Uncategorized
Trending

कविता

ईस तरह हाल मेरा जेसे ‘कोई दुल्हन गर्मी से परेशां लाजकि देहरी लाघँ बेनकाब हो गई ।
कल तक तो सबकुछ ठिक था ‘जाने क्या हुआ अचानक मेरी तबीयत खराब हो गई ।

कल तक था सब ठिक ठाक ‘ खीला था चेहरा बेशकीमती बादाम सा ।
आज छिँके छलांग लगा रही ‘जुकाम से हो गया चेहरा चुसे हुऐ आम सा ।
हाल चाल पुँछने वालों का तांता सा लगा ‘घर मेरा लग रहा चारोधाम सा ।
पत्नी ने फेशबुक से दुर रहने के निर्देश दिये ‘कहा आराम करने को ‘ आज हमभी खुदको महसुस कर रहे सच्चे जोरुके गुलाम सा ।
सर से पाँव तक दर्द ही दर्द ‘कमबख्त पुरा बदन ‘ पुराने सामान कि तरह टुट रहा हे ।
ये बुखार सा कोई दुश्मन हे जो ‘हमारी सेहत कि दोलत को लुट रहा हे ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *