
रक्तदान से बढ़कर जग में कोई दान नहीं,
इसके जैसा मानवता का पावन सम्मान नहीं।
एक बूंद लहू की किसी की साँसें लौटा देती है,
जीवन देने वालों से बढ़कर कोई भगवान नहीं।
रक्त की हर बूंद में आशा का संचार है,
पीड़ित जन के जीवन का यह दृढ़ आधार है।
जो अपना रक्त देकर किसी का दर्द हर लेता,
सच पूछो तो मानवता का वही सच्चा उपहार है।
रक्त ना हो अग़र तन में भला कैसे जिए कोई,
है अचरज क्या रक्तवीरों को ईश्वर जो कहे कोई !
लहू इनका ही पाकर के ज़िंदा इंसानियत अब तक,
आइए आगे पाकर रक्त आपका भी जिए कोई !!
चरम सीमा वात्सल्य की है जो करते रक्त का दान हैं,
तन से ज्यादा जिनको प्यारी लगती दूजों की जान है,
अनजाने चेहरों की खातिर बूंद बूंद जो लुटा देते,
निस्वार्थ जो सेवा करते मानवता की सच्ची शान हैं !!
महिला शक्ति ने भी थामी रक्तदान की कमान हैं,
इक्कीसवीं सदी में बढ चढकर बचातीं औरों के प्राण हैं,
ना केवल जीवन देती हैं, बल्कि जीवन भी बचाती हैं
देवदूत बनकर आयी इस नारी शक्ति को सलाम है!
अनजानों की खातिर जो रक्त का दान करते हैं,
लहू ऱगों में बहता है, धड़कन बनके धड़कते हैं,
जीते हैं जब तक प्राणी वो उनका उपकार निभाते हैं,
ऐसे फरिश्तों का हम सब शत् शत् अभिवंदन करते हैं!!
विरेन्द्र जैन “माहिर”
नागपुर महाराष्ट्र











