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पिता के कंधो पर चड़कर जो अपने घर बसाते हैं!


सच पिता को भुलकर आजकल बेटे सिर्फ जवांई हो जाते हैं!
जन्मदाता से पत्नि प्रदाता बेटो कि नजर में बड़ा हैं!

बचपन में जो बेटों के लिए अभावो के दुश्मनो से लड़ा हैं!
जिनको उंगली थामकर चलना सिखाया वो पिता को अंह की उंगली दिखाते हैं!

पहले की कहावत गलत अब बेटियां नहीं बेटे पराये हो जाते हैं!
आजाद खयाल हो गये बेटे बुड़े पिता उनके विचारो से बेकार का बोझ हैं!

उचित वक्त की तलाश हैं उन्हें घर से दुर ऐक अनाथालय की तलाश हैं!

बचपन में जिन गालों पर आंसु पिता की निंद उड़ा देते थे!
देकर थपकी चुप कराने को उन्हें कंधो पर उठा लेते थे!
आजकल के बच्चे श्रवण का नहीं ओरगंजेब का ईतिहास पड़ा करते हैं!

अपने जन्मदाता को आजकल बच्चे तन्हाईं के पथपर खड़ा करते हैं!

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