
घर में अपने रों रहा हूँ पीटकर कपाड़ रे कान्हा
कितना लेगा अब तु मेरा इम्तिहान रे कान्हा
अब तो बूला ले शरण में अपनी वृंदावन रे कान्हा
कितना लेगा अब तु मेरा इम्तिहान रे कान्हा
गीता में तूने कहा है मैं ही जग और जीवन हूँ
मेरे अतिरिक्त कोई नहीं मैं ही मृत्यु और जीवन हूँ
बिखर गया अब तो मेरा घर परिवार रे कान्हा
कितना लेगा अब तु मेरा इम्तिहान रे कान्हा
तुझको वही पातें हैं जो सब्र दिल में रखतें हैं
तेरी भक्ति में मगन दिन रात जो भी रहतें हैं
मुझकों अब नहीं भा रहा ये संसार रे कान्हा
कितना लेगा अब तु मेरा इम्तिहान रे कान्हा
होनी को अनहोनी कर दे अनहोनी को होनी
तूं हीं दया माया कान्हा और तूं हीं परेशानी
कब तक करूं अब मैं तेरा इंतज़ार रे कान्हा
कितना लेगा अब तु मेरा इम्तिहान रे कान्हा
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से













