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प्रभाती वंदन के साथ निर्जला एकादशी

ज्येष्ठ शुक्ल शुभ पक्ष की, एकादशी महान।
सर्व वेद श्रुति संत जन इसका किए बखान।
जो करते उपवास हैं, व्रत का सुने महात्म्य,
उन पर बरसे है कृपा,सदा विष्णु भगवान।।

संयम साहस ओज भर,तन मन भरें उमंग।
संबल मिलता है उसे, रहते प्रभुवर संग।
दूर सकल बाधा करें, लक्ष्मी जी के नाथ,
पूजन करते भक्त जो,जीत सभी लें जंग।।

नारायण को नित नमन,करिए मन से ध्यान।
करते हैं कल्याण प्रभु,जीवन हो आसान।
मन की दुविधा त्याग कर, रखिए सबसे मेल,
कोशिश हर पल कीजिए, रचिए नवल विधान।।

मन में शुचिता भाव भर,भरें ज्ञान का सार।
कर को थामें राम जब, बेड़ा होता पार।
भव बाधा सब दूर कर, काँटें यम का फंद,
सुंदर रूप स्वरूप है,महिमा बड़ी अपार।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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