
मार भरत को दिया आपने,पर सच को दबा न पाओगे।
किया लोभवश काम बुरा है,निज गलती पर पछताओगे।।
बिना अपराध के ही तुमने,एक निर्दोष को मारा है।
दानव बन करके इक माँ से,छीना आँखों का तारा है।
नहीं भरत को मारा तुमने,अवितथ का गला दबाया है।
एक न्याय प्रिय की हत्या कर,वर्दी पर दाग लगाया है।
फाँसी के फंदे पर इक दिन, तुम सब लटकाए जाओगे।
किया लोभवश काम बुरा है,निज गलती पर पछताओगे।।
न्याय हेतु आवाज उठाना,क्या?होता अपराध बताओ।
दोषी था यदि भरत तिवारी,कोई तो सबूत दिखलाओ।
एक निहत्थे नर को तुमने, क्यों? आखिर गोली मारी है।
जवाब तुम को देना होगा,पूछ रही जनता सारी है।
जिनके कहने पर मारा है,उनका भी नाम बताओगे।
किया लोभवश काम बुरा है,निज गलती पर पछताओगे।।
समाज की सेवा की खातिर, जिसने अपना सबकुछ वारा।
क्या? ग़लती थी उस लड़के की,घेर पुलिस ने उसको मारा।
जुर्म किया था उसे पकड़ते, लेकर थाने उसको जाते।
खुद ही न्यायधीश बन करके, गोली उस पर नहीं चलाते।
देख चुकी जनता अब सबकुछ, कैसे अब साक्ष्य मिटाओगे।
किया लोभवश काम बुरा है,निज गलती पर पछताओगे।।
किया ग़लत जिनके कहने पर,वो भी न बचाने आएंगे।
नहीं जानते हैं तुम सबको,यह कहकर पिण्ड छुड़ाएंगे।
बिन सोचे समझे ही तुमने,अन्यायी का साथ दिया है।
मार भरत को बस तुम सबने,दाग स्वयं पर लगा लिया है।
सबकुछ सम्मुख जनता के है,अब कैसे? पाप छुपाओगे।
किया लोभवश काम बुरा है,निज गलती पर पछताओगे।।
जाने वाला चला गया है,पर सोच अभी भी जिन्दा है।
किया कृत्य जो तुम लोगों ने, पुलिस प्रशासन शर्मिंदा है।
इक मारा है भरत तिवारी,अब लाखों फिर से आएंगे।
नहीं मिलेगा न्याय अगर तो, फिर से बंदूक उठाएंगे।
भीड़ खड़ी होगी जब भारी,किस-किस पर शस्त्र चलाओगे।
किया लोभवश काम बुरा है, निज गलती पर पछताओगे।।
राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)













