
रात की रिमझिम बारिस,
प्राकृति को हरी-भरी बना देती है l
बरखा धूल व कीचड़ को धोकर,
प्रकृति को खुशनुमा करती है ll
ठंडी हवा और भीनी खुशबू,
सुकून का एहसास करती है l
ठंडी हवा के झोंको संग,
बरखा रिमझिम सी आती है ll
गाँव व शहर सो गए गहरी नींद में,
जागी बरखा के बूंदों की ताल l
पेड़- पौधों के पत्तों पर गिरती,
करती मधुर संगीत कमाल ll
बारिस की हर एक बंद मोती है,
जो आज रात में बिखेरा है l
सोए हुए गाँव व शहर को,
बारिस ने नया रंग सावरा है ll
सुबह जब सूरज की किरणें,
भीगी हुई प्रकृति को छुयेगीं l
रात की बारिस की पहल में,
दुनिया प्रकृति खिल उठेगी ll
रचनाकार- नंदकिशोर गौतम
(माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्यमिक विद्यालय बकोड़ी, ब्लॉक कुरई,
जिला सिवनी म. प्र.,
पिन कोड 480771













