
छप्पन वर्षों की यह अनुपम कहानी,
प्रेम, विश्वास की अटूट रवानी।
सुख की धूप हो या दुःख की छाँव,
साथ निभाया हर पल, हर गाँव।
एक-दूजे का बनकर संबल,
आदित्य-पद्मा, जीवन-पथ पर बढ़ते रहे हर पल।
त्याग, समर्पण और स्नेह की ज्योति,
जिससे महका हमारा हर एक कोना, हर एक प्रीति।
अनिता की हँसी में आपका आशीष,
रंजू की दुआओं में आपका विश्वास।
नीरज की हर सफलता में आपका मान,
सूरज से चमके आपका आसमान।
आपने सिखाया रिश्तों का मान,
सम्मान, धैर्य और प्रेम की पहचान।
संघर्षों को मुस्काकर अपनाना,
और हर परिस्थिति में साथ निभाना।
जो कुछ हम हैं, आपकी ही देन है,
हर सफलता में आपका आशीर्वाद निहित है।
आपका जीवन हमारे लिए प्रेरणा का प्रकाश,
जिससे आलोकित होता है हर विश्वास।
ईश्वर से बस यही प्रार्थना है हमारी,
बनी रहे सदा यह जोड़ी प्यारी।
स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें, दीर्घायु हों आप,
सदा बना रहे हम सब पर आपका आशीर्वाद।
छप्पन वर्षों का यह पावन बंधन,
युगों-युगों तक रहे अटल और वंदन।
आपको 56वीं वैवाहिक वर्षगाँठ की
अनंत शुभकामनाएँ एवं सादर प्रणाम।
नीरज मिश्र ‘विद्यावाचस्पति’
आदित्यायन, सैनिक नगर, लखनऊ













