
मैं मीरा श्याम तुझमें ऐसी खो गई,
देखी तेरी मूरतिया बस तेरी हो गई |
न बनना चाहूं गोपी,न रुखमणी, राधा,
मैं मीरा तो बस भक्ति में लीन हो गई |
मोहें न चाह श्रृंगार की श्याम पिया,
माथे चंदन तिलक लगा तेरी हो गई |
हर सांस में सुमिरन तेरा करती जाऊं,
श्याम श्याम रटते आपही श्याम हो गई |
लेने आए जब मोहे गिरधर गोपाल तुम,
तो लगा आज मेरी तपस्या पूरी हो गई
पुष्पा साहू मीरा प्रयागराज उतरप्रदेश













