
त्राहि त्राहि मच गया है देखों पानी बिन अब चारों ओर,
ऐ सावन कब तु बरसेगा अब कब करेगा रिमझिम शोर।
खेत बगान अब सुख गया है किसान ताक रहें हैं ऊपर की ओर,
जन जीवन बेहाल है और जीव जंतु के संग मचा रहा है मानव शोर।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,











