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कुंदन: आग से निकली पहचान

डाक्टर दीपक गोस्वामी
मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक


आप देश के चर्चित लेखक,मोटिवेशनल स्पीकर, ट्रेनर,सामाजिक कार्यकर्ता है।

बिल्कुल सही। यही नाम है तुम्हारा।

कुंदन कोई मामूली सोना नहीं होता। वो हज़ार चोटें खाकर, हज़ार बार तपकर, तब जाकर बनता है। उसकी कीमत सिर्फ वज़न से नहीं, उसकी तपिश से तय होती है।

तुम भी वही हो। दुनिया तुम्हें अभी कच्चा समझ रही है। पर तुम जानते हो कि तुम्हारी भट्टी जल रही है। तुम्हारा सुनार जाग रहा है।

जब मुकाम आएगा, तो लोग तुम्हारी चमक देखेंगे। पर तुम अपनी आग याद रखना। क्योंकि पहचान चेहरे से नहीं, तपिश से बनती है।

जा कुंदन। दुनिया को बता कि आग से डरते नहीं, आग से निखरते हैं।

अब बस पूरी दुनिया में धूम मचा दो।ना आग में तपकर ही कुंदन बनता है। और तुम भी सोना हो दोस्त। कच्ची धातु नहीं, 24 कैरेट हौसला हो। बस तपिश से गुज़रना बाकी है।

दुनिया कहती है सोना चमकता है। पर कोई नहीं बताता कि चमक से पहले वो जलता है। हजार डिग्री की भट्टी से गुज़रता है। हथौड़े की चोटें खाता है। तब जाकर उसका रूप निखरता है, तब जाकर वो गहना बनता है। तुम्हारी ज़िंदगी भी वही भट्टी है। तुम्हारे आँसू वही आग हैं। तुम्हारी मेहनत वही हथौड़ा है।

रुको मत। गलो मत। बिखरो मत। तपो।

जब हालात की आग तेज़ हो जाए तो घबराना मत। सोना आग में पिघलता नहीं, निखरता है। तुम भी निखरोगे। लोग कहेंगे कि टूट गए, पर तुम जानते हो कि तुम टूट नहीं रहे, तुम ढल रहे हो। नए साँचे में। नई शक्ल में। नई पहचान में।

याद रखो, कोयला भी दबाव में ही हीरा बनता है। पर तुम कोयला नहीं हो। तुम पहले से ही सोना हो। तुम्हें बस अपनी चमक पर भरोसा करना है। खुद को कम मत आँको। तुम्हारी कीमत दुनिया तय नहीं करेगी। तुम्हारी कीमत तुम्हारी तपिश तय करेगी। जितना तपोगे, उतना खरे होगे। जितना खरे होगे, उतना कीमती होगे।

कुछ लोग होंगे जो तुम्हारी आग को बुझाना चाहेंगे। कहेंगे कि शांत हो जाओ, ठंडे पड़ जाओ। पर तुम सुनना मत। ठंडा सोना सिर्फ़ तिजोरी की शोभा बढ़ाता है। तपता हुआ सोना इतिहास बनाता है। तुम्हें तिजोरी में बंद नहीं होना, तुम्हें लोगों के दिलों में बसना है। गले का हार बनना है। सिर का ताज बनना है।

और सुनो, सोने की एक खासियत होती है। वो जंग नहीं खाता। चाहे मिट्टी में दबा दो, चाहे पानी में डुबो दो, उसकी चमक वैसी की वैसी रहती है। तुम भी ऐसे ही बनो। दुनिया की नफरत, दुनिया की सियासत, दुनिया की चालाकी, कुछ भी तुम्हारी आत्मा पर जंग न लगा पाए। तुम्हारा चरित्र तुम्हारा सोना है। उसे बचाकर रखो।

कभी कभी लगेगा कि आग बहुत तेज़ है। लगेगा कि अब सहा नहीं जाता। उस वक़्त खुद को याद दिलाना कि सुनार जब सोना तपाता है तो उसकी नज़र हर पल सोने पर होती है। वो एक पल के लिए भी नहीं हटता। क्योंकि वो जानता है कि एक पल की चूक और सोना जल जाएगा। ऊपरवाला भी तुम्हारा सुनार है। वो तुम्हें तपा रहा है, पर जला नहीं रहा। वो जानता है कि तुम कितना सह सकते हो। वो तुम्हारी तपिश का हिसाब रखता है।

इसलिए शिकायत मत करो। धन्यवाद करो। हर ठोकर तुम्हें आकार दे रही है। हर दर्द तुम्हें धार दे रहा है। हर आँसू तुम्हें चमका रहा है।

सोना अकेला भी कीमती होता है, पर जब उसमें हीरे जड़ते हैं तो उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है। तुम भी अपने जीवन में अच्छे लोग जोड़ो। ज्ञान के हीरे, अनुभव के मोती, संस्कार के नगीने। अकेले चमकोगे तो भी ठीक, पर साथ चमकोगे तो दुनिया देखेगी।

और सबसे बड़ी बात। सोना कभी अपनी तपिश नहीं भूलता। वो गहना बनने के बाद भी जानता है कि वो आग से निकला है। तुम भी सफल होकर अपनी संघर्ष की कहानी मत भूलना। जिस दिन तुम अपनी तपिश भूल गए, उस दिन तुम्हारी चमक फीकी पड़ जाएगी। विनम्रता ही सोने की असली खूबसूरती है।

तो अब क्या करना है?

तपना है। बिना रुके, बिना झुके, बिना थके। क्योंकि दुनिया को गहने चाहिए, और गहने आग से ही बनते हैं। तुम वो आग हो। तुम वो सोना हो। तुम वो कारीगर हो।

जब लोग पूछें कि इतने निखरे हुए कैसे हो, तो मुस्कुराकर कह देना: जले हैं, इसलिए चमक रहे हैं।

उठो। भट्टी तैयार है। हथौड़ा तैयार है। सुनार तैयार है।

बस तुम तैयार हो जाओ।

क्योंकि 1000 डिग्री की तपिश के बाद ही 1000 साल की चमक मिलती है। और तुम 1000 साल तक चमकने के लिए बने हो।

ये शब्द नहीं हैं , ये 1000 अंगारों की तपिश है। इन्हें अपनी मुट्ठी में भींच लो। जब भी अँधेरा लगे, मुट्ठी खोल देना। उजाला खुद ब खुद हो जाएगा।

अब जाओ। तपो। निखरो। चमको।

दुनिया को सोना चाहिए, और वो सोना तुम हो।

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