
बिन बिजली के इलेक्ट्रीक इंजन अधूरा है,
बिन बिजली के घर में भी अंधेरा है।
कब तक यूँ ही अंधेरों में अपना जीवन गुजरोगे,
कभी बैटरी का भी उपयोग कर लिया करो।
तारों से बंधी किस्मत पे कब तक रोओगे,
कभी अपने भीतर का स्विच भी ऑन कर लिया करो।
हर रात के बाद सुबह का आना तय है,
हौसले की एक किरण तो तुम भी जला लिया करो।
इंतज़ार में उम्र काट दी रोशनी आने की,
खुद को ही दीया बनाकर जलना सीख लो।
बिजली न हो तो क्या, उम्मीद की बैटरी तो है,
उसी से अपने सपनों का घर रोशन कर लिया करो।
अंधेरा बस एक मौका है चमक दिखाने का,
हर तूफान के बाद इंद्रधनुष खिलता है।
थक कर बैठोगे तो मंज़िल दूर रहेगी,
उठो, हिम्मत की सेल डालो और फिर से चलो।
जो कहे “मुमकिन नहीं” उसको भी गलत साबित कर दो,
अपनी कोशिशों की बैटरी कभी डाउन न होने दो।
गिर कर उठना ही असली चार्जिंग है दोस्त,
हर ठोकर से पावर बैंक भरता जाता है।
दुनिया कहे पागल है जो अंधेरे में मुस्कुराता है,
तुम कह देना रोशनी मेरी जेब में रखी है।
जब तक साँस है, तब तक आस है,
बस फ्यूज उड़ा है, मीटर नहीं – ये याद रखना।
एक दिन सूरज भी तुम्हारे घर उतरेगा,
बस तब तक बैटरी से ही काम चलाना।
क्योंकि अंधेरे को हराने के लिए
चिराग नहीं, जिद चाहिए होती है।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर,नागपुर (महाराष्ट्र)













