
क्या करें कोई नहीं सुनता है,,,,,
पिछले दिनों जब मैंने हंसने की दुकान खोली तो कोई बात तक करने नहीं आया,,,
आदमी को
जब जिभर के रोने से राहत मिलती है तो,,,
खुब रो ले,,,
हंसी से पहले रोने में राहत मिलती है तो रो लेने दे,,,,
हल्का होने दें,,,
आदमी अक्सर कभी,,,,
गमी में कोई चुप हो कर रहता है तो सबको चिंता खाए जाती है,,,
उसके साथ रूलाने वाले कई जतन करते हैं,
उसे रूलातें है,,,,
जो व्यक्ति किसी के साथ कभी हंसता खेलता नहीं है,,
वो फिर अकेला ही रोता है,,,,
जो व्यक्ति
काम नहीं करता है तो हमारे बीच नल्ला हो कर रोता फिरता है,,
पढ़ाई कर किसी को नोकरी नहीं मिलती है तो किस्मत को रोता है,,,
पसंद की शादी नहीं हुई तो घर वालों को रोता रहता है,,,,
धन खर्च करने वाले लोगों को सुकून नहीं मिलता है तो वो भी भाग्य को रोते है,,,
अशोक कुमार सुमन,
भवानी मंडी,
(राज.)













