
जब जब आऐं मन में
नकारात्मक से भाव
मन को एकाग्र कीजिए
दीजिए थोड़ा सा विश्राम
फिर धैर्य से बैठकर
करना इतना सा काम
कॉपी पेन लेकर लिखना
जिंदगी के अभूतपूर्व खुशी के
क्षण और आयाम
और लेना उन्हें तुम धीरे से थाम
देखने को मिलेगा मन को सुकून और आराम
धीरे धीरे स्वयं के जीवन के
उज्जवल पटल खुलेंगे
मन में खुशियों के दीप जलेंगे
तभी हम स्वयं को सही समझ सकेंगे
मन के तमस को मिटा पाएंगे
आसपास खुशियां बांटने से
स्वयं को श्रेष्ठ पाएंगे
शनैं शनै आत्मज्ञान का बोध कर पाएंगे
प्रभु भक्ति में लौं लगा पाएंगे
हर दिन स्वयं को महत्वपूर्ण पाएंगे
मन में खुशियों के पल भर जाएंगे
शीलू जौहरी भरूच













