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सुविचार

मेरा वतन है यहां मेरा मन है यह

मन में निरंतर क्रिया और प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है।

प्रतिक्रिया में विरोधाभास जन्म लेता है ,
कोई विरोध भी कर सकता है
और कोई समर्थन भी दे सकता है।
क्रिया में,,,
योगीऔर वियोगी दौनो हि कहा जा सकता है, किसी वस्तु की
शुद्धता की प्रमाणिकता की जानकारी नहीं हो तो भी शुद्ध तो शुद्ध है ।

और विशुद्धता सदैव द्वंद की धारणा उत्पन्न करती है,

हमेशा समझ से काम लें
झुठी हंसी, झुठी शान झूठे लोग
झुठी बातें,
झुठी शिक्षा
यह सब
निरंतर प्रयास यही करते हैं कि हमारी वाहि वाहि हो, नकली वस्तु का प्रचार हो
प्रकाशन हों,
उत्पादन हों,
छबी बनी रहे,

मगर हमारे समाज में गुणवत्ता देखी जाती रही है,,

नकली माल वाला स्पष्ट
लिखता है कि,,
नकली कि गारंटी

हर क्षेत्र में जागरूकता का प्रवेश हो,
प्रत्यक्ष का प्रमाण प्रभाव हो, और गुणवत्ता को स्वीकार करते हुए शिक्षित किया जाए, परख कर जांच कर किसी को स्तेमाल किया जाए,
ग़लत शिक्षा , नकली वस्तु,
नकली संस्था,
गलत दोस्त,
बेवजह कि बात कुसंगति,
फिजूल खर्ची, और
दिखावटी रिश्ता निभाना,,
इन सबके बीच नहीं रहे,
इनसे परहेज करें ।

अशोक कुमार सुमन भवानी मंडी (राज.)

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