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नमक जैसा बन जाओ

नमक जैसा बन जाओ
नमक ही अब, बन जाओ
बहुत हो चुका मीठी शहद
अब बनना है,खारा नमक।

ये दुनिया बहुत स्वार्थी है
हर कोई, खुद मे जीती है
परवाह नही यहाँ दूसरे की है
बस,काम निकालना खुद की है ।

इस्तेमाल की वक्त तो
ऐसे लोग यहाँ बनते है
जैसे,उससे बड़े हितैषी
जगत मे यहाँ, कोई नही है।

और काम निकलते ही लोग वही
ऐसे रफूचक्कर होते है,जैहे कभी मिले नही
थक-हार कर दुनिया की रीति रिवाज
अब खुद को ही लगता है लाज ।

कि,,नही बने रहेंगे शहद सी मीठी
बन जाने दो,खारे नीमकी
जो भी,इस्तेमाल करना चाहेंगे
सोच समझकर ही हाथ लगायेंगे ।

ज्यादा क्या,कुछ भी लेने से सोचेगे,
कि,कही सब मेरे गुड गोबर न तो,हो जायेगे?
बस,इसी बात का वो भय खायेंगे
नमक है ये,सोचकर ही उठायेंगे ।

यही बात तो चुन्नू कवि कहना चाहता है,
ऐसा बनो कि,ले तो,ना ले तो,भी लोग पछताता है
नमक की यही तो विशेषता है।
ना दिखे मूल्यवान, फिर भी अहसास कराता है।

बन जाओ सारे इंसान बस ,नमक सा
फिर देखो,सारे जमाने का तमाशा
बस,इस्तेमाल के लायक ही लेंगे
और दिल से धन्यवाद भी दे जायेगे

चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड

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