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संघर्ष, सेवा और संस्कारों की अमिट विरासत : स्वर्गीय रेवती प्रसाद शर्मा

संघर्ष, सेवा और संस्कारों की अमिट विरासत : स्वर्गीय रेवती प्रसाद शर्मा

रुंधी, पलवल, हरियाणा। जीवन में संघर्ष, कर्मनिष्ठा, ईमानदारी, सहृदयता और संस्कारों की ऐसी अमिट छाप छोड़ने वाले स्वर्गीय रेवती प्रसाद शर्मा का जन्म १६ जनवरी १९५५ को हुआ था। माता हरभेजी देवी की सातवीं संतान एवं दो पुत्रों के असामयिक निधन के पश्चात जन्मे पुत्र के रूप में परिवार ने इनके जन्म को ईश्वर की विशेष कृपा माना और इसी भाव से इनका नाम रेवती प्रसाद रखा गया। इनके जन्म पर परिवार में हर्षोल्लास के साथ भव्य जन्मोत्सव मनाया गया।

पड़ोसी गाँव से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद इन्होंने उच्च शिक्षा के लिए पलवल का रुख किया। उच्च कक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने के पश्चात झज्जर स्थित बहुतकनीकी महाविद्यालय से अभियांत्रिकी में डिप्लोमा प्राप्त किया। वर्ष १९७३ में इनका विवाह श्रीमती कृष्णा से हुआ। जीवनसंगिनी के रूप में श्रीमती कृष्णा ने इनके संघर्षपूर्ण जीवन में स्नेह, सहयोग और उत्साह का संचार किया।

डिप्लोमा पूर्ण करने के पश्चात रोजगार के लिए इन्हें लंबे संघर्ष से गुजरना पड़ा। कठिन परिस्थितियों के बीच बड़ी पुत्री के जन्म के पश्चात इन्हें फरीदाबाद थर्मल पावर प्लांट में कनिष्ठ अभियंता के पद पर नियुक्ति मिली। वर्ष १९८८ में सरकार द्वारा इन्हें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय भेजकर अभियांत्रिकी में स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया गया। अपनी लगन, परिश्रम और तकनीकी दक्षता के बल पर इन्होंने निरंतर प्रगति की।

वर्ष १९९६ में पदोन्नति के पश्चात इनका स्थानांतरण भाखड़ा बाँध परियोजना में हुआ। वहाँ कार्यरत रहते हुए इन्होंने अपनी दोनों पुत्रियों के विवाह संपन्न किए। वर्ष २००८ में इनका स्थानांतरण यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बाँध पर हुआ, जहाँ पुनः पदोन्नति प्राप्त कर इन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन किया।

अपने कार्यक्षेत्र में विद्युत उत्पादन बढ़ाने तथा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में इनका विशेष योगदान रहा। विद्युत चोरी जैसी समस्याओं की रोकथाम के लिए इनके द्वारा किए गए अनेक उपाय अत्यंत कारगर सिद्ध हुए। कार्यकाल के दौरान उत्कृष्ट विद्युत उत्पादन के लिए इन्हें कई बार सम्मानित किया गया। वर्ष २०१३ में सेवानिवृत्ति के पश्चात इन्होंने अपना शेष जीवन परिवार और खेती को समर्पित कर दिया।

स्वर्गीय रेवती प्रसाद शर्मा का व्यक्तित्व अत्यंत सहृदय, मिलनसार, सरल और ईमानदार था। वे अपने कार्य के प्रति पूर्ण निष्ठा रखते थे और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहने के साथ पशु-पक्षियों तथा पर्यावरण के प्रति प्रेम रखने की प्रेरणा देते थे। किसान परिवार की पृष्ठभूमि होने के कारण सेवानिवृत्ति के पश्चात खेतों से उनका विशेष लगाव रहा और उन्होंने खेती-किसानी को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाए रखा।

१७ अगस्त २०२६ को छत से गिरने के कारण उनका आकस्मिक देहावसान हो गया। उनके निधन से परिवार, संबंधी, परिचित एवं समस्त शुभचिंतक गहरे शोक में डूब गए। महाप्रयाण से पूर्व भी वे बच्चों के साथ पतंग उड़ाते हुए देखे गए थे। उनका यह सहज, स्नेहिल और जीवंत रूप उनके प्रियजनों की स्मृतियों में सदैव अंकित रहेगा।

स्वर्गीय रेवती प्रसाद शर्मा अपने पीछे केवल चल-अचल संपत्ति ही नहीं, बल्कि अपने बच्चों और परिवार के लिए उत्तम संस्कार, कर्मनिष्ठा, ईमानदारी तथा भक्ति परायण जीवन की अमूल्य विरासत छोड़ गए हैं। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता रहेगा कि ज्ञान जहाँ से और जिस माध्यम से मिले, उसे ग्रहण करना चाहिए तथा अपने से बड़ों का सदैव सम्मान करना चाहिए।

उनके सरल, भक्तिमय, मिलनसार और सहृदय व्यक्तित्व को समाज तथा उनके सभी परिचितजन सदैव श्रद्धापूर्वक स्मरण करते रहेंगे।

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