
हमें दौलत का अंबार नहीं चाहिए,
हमें दिखावे का श्रृंगार नहीं चाहिए,
तुम बस अपने सपने साथ लाना,
बाकी हर मंजिल हम खुद पा लेंगे।
न सोना चाहिए, न चांदी चाहिए,
न दहेज में कोई निशानी चाहिए,
तुम बस खुद को दुल्हन बनाकर चली आना,
तुम्हारे पंखों के लिए खुला आसमान लाएंगे।
हमें न गाड़ी चाहिए, न बंगला चाहिए,
न सोने की चमक वाला कोई टुकड़ा चाहिए,
हमें तो बस एक हमसफर चाहिए,
जो कंधे से कंधा मिलाकर चले।
तुम अपनी डिग्री, अपनी नौकरी लाना,
अपनी हँसी, अपनी समझदारी लाना,
तुम अपनी उड़ान लाना, अपनी पहचान लाना,
बाकी दुनियादारी हम खुद संभाल लेंगे।
कार-मोटर का बोझ मत लाना,
बर्तन-कपड़ों का हिसाब मत लाना,
तुम बस अपने ख्वाबों की किताब लाना,
हर पन्ने पर हम नया ख्वाब लिखेंगे।
दहेज एक बोझ है, एक कर्ज है,
ये बेटी के पापा पर सबसे बड़ा फर्ज है,
हम इस रिवाज को यहीं मिटाएंगे,
एक नई रीत दुनिया को दिखाएंगे।
तुम तितली हो, तुम्हें उड़ने देंगे,
तुम्हारे हर ख्वाब को पूरा करने देंगे,
तुम्हें घर की नहीं, दिल की रानी बनाएंगे,
और तुम्हारे पंखों को कभी कटने न देंगे।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला अमन सनातनी
सावनेर नागपुर महाराष्ट्र












