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कविता

ऐसी संगति किस काम की ,

जो जीवन गर्द कर दे ,

ऐसी शिक्षा बेकार है,

जो भटका दे अंधियारे में उम्र भर,

ऐसी दोस्ती बेकार है,
जो कभी खैर खबर नहीं ले,

ऐसी मेहबूबा प्रेमिका नहीं हो सकती,

जो अपने दिल से दूर कर दे,

ऐसी मोहब्बत किस काम की,

जो परिवार में नफ़रत भर दे,

ऐसी आसमां की सैर कराती भफकियां छौड़ दो,

जो जमीं पे जुड़े हुए लोगों से मिलने नहीं दे,

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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