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औघड़दानी चालीसा

दोहा
उमा सहित उर में करो,शिव जी सदा निवास।
करुणा कर मुझ”राम”को,बना चरण लो दास।।
हाथ जोड़ कर वंदना, करते भोलेनाथ।
अपने सेवक”राम” के,रहना हरदम साथ।।

जयति जयति जय शिव अविनाशी।शुभता कारक जय सुखराशी।।
जयति जयति जय श्री गुरुदेवा।सकल कलाधर जय महदेवा।।१।।
नीलकंठ शिव औघड़दानी।जय जय जय बाबा बर्फानी।।
सकल अमंगल मूल निकंदन।जयति जयति जय जय दुखभंजन।।२।।
जय जय जय हे त्रिभुवन स्वामी।सत्य सनातन के अनुगामी।।
गौरापति श्री राम उपासक। महाकाल त्रिभुवन के शासक।।३।।
जग पालक करुणा के सागर।आदिपुरुष समरथ भटनागर।।
जयति जयति जय जय बैरागी।राम नाम माला अनुरागी।।४।।
सकल कलाओं के हो ज्ञाता।जयति जयति जय भाग्यविधाता।।
जयति जयति जय जय त्रिपुरारी।त्रिपुर राक्षसों के संहारी।।५।।
जय जय जय भोले भण्डारी।सकल सृष्टि के पालनहारी।।
जीवन मृत्यु मोक्ष के दाता।राजा दक्ष के आप जमाता।।६।।
सत्य सनातन के संवाहक।सकल सृष्टि के प्रभु संचालक।।
आदि अनादि अविचल अविनाशी।जयति जयति जय जय कैलाशी।।७।।
लीला अपरम्पार तुम्हारी।जयति जयति जय लीलाधारी।।
सारे तन पर भस्म रमाए।विकट व्याल गल में लटकाए।।८।।
वृश्चिक कुण्डल कान निराले।मुण्ड माल गल में हैं डाले।।
कर त्रिशूल अरु डमरू सोहे।रूप निराला मन को मोहे।।९।।
जटा जूट सिर गंग विराजे।माथे सुन्दर चंदा साजे।।
नंदी जी की करें सवारी।संग विराजें गौरा प्यारी।।१०।।
व्याघ्रचर्म तन सुन्दर न्यारा।बहे गंग सिर निर्मल धारा।।
भेष बनाए शिव संन्यासी,रहें लीन तप बारहमासी।।११।।
राम नाम की जपते माला। पिएं सदाशिव विष का प्याला।।
नहीं जगत दूजा धनुधारी।रौद्र रूप शिव प्रलयंकारी।।१२।।
लीला शिव की सबसे न्यारी।भक्ति भाव पूजें नर नारी।।
सहज भाव खुश होते शंकर, साधक देते मनवांछित वर।।१३।।
भाँग धतूरा मन अति भाता।गंग नीर अरु दूध चढ़ाता।।
लीन साधना रहें हमेशा।हरते हरदम दास कलेशा।।१४।।
विकट रुप विकराल भयंकर।हर बाधा हर लें अभयंकर।।
विघ्न विनाशक मंगलकारी।सर्वज्ञ कपर्दी भव कामारी।।१५।।
वीर पुरोधा अति बलशाली।जग में सबसे शान निराली।।
कोई शिव से पार न पाया।सर्व विदित है शिव की माया।।१६।।
भव बाधा को हरने वाले।ज्ञान दीप उर धरने वाले।।
खाली झोली भरने वाले।सबका मंगल करने वाले।।१७।।
शंभु चरण जो शीश झुकाता। उसे नहीं दुख कभी सताता।।
जन्म-जन्म के पाप नशाता।अंतकाल सद्गति को पाता।।१८।।
कभी न जाता दर से खाली।जो भी आता द्वार सवाली।।
जो भी करता नित्य साधना।पूरी करते मनोकामना।।१९।।
भक्ति भाव जो नित शिव ध्याता।कभी नहीं घर खाली जाता।।
शिव महिमा को जो नर गाते।मनचाहा वर शिव से पाते।।२०।।

                         *दोहा*
   उमा सहित जो शंभु का,धरते हैं नित ध्यान।
   उनकी पूरी कामना, करते शिव भगवान।।

   राम जी तिवारी"राम"
                          उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

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