
श्याम श्याम घनश्याम, ऐ मुरलीवाले।
नाव हैं अब मेरी, तेरे हवाले।।
बीच भंवर में ये, डोल रही हैं,
तू न सम्हाले तो, इसे कोन संभाले।।
कंस जरासंध को, तुमने मारा है।
दुखी प्रजा जन को, तूमने तारा हैं।।
द्रोप्ती के मान को, जाकर बचाया हैं।
खीचखींच साडी को,दुश्मन थकाया है।।
तुम दया के सागर, काली कमलीवाले।
तूं न सम्हाले तो, कहे कोन सम्हाले……
गोकुल में जन्म ले, गऊ चराई थी।
यमुना के तट पे, बंशी बजाई थी।।
कालिंदी में गेंद, खुद ने, गिराई थी।
काले पर नाच कर,दहशत मिटाई थी।।
गुणगान केसे हो, ऐ नंद के लाले।
तू न सम्हाले तो,मुझे कोन सम्हाले।।…….
ए राधे के मोहन, गोकुल के ग्वाले।
ऐ देवकी नंदन, वासुदेव के लाले।।
ओ रास के रचेता, यशोदा के पाले।
गोरधन को उंगली पर उठाने वाले।।
आजा रे अब मोहन,मन चुराने वाले।
तू न सम्हाले तो मुझे कोन सम्हाले।।…….
गीतकार मनोहरसिंह चौहान मधुकर











