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कविता

अब आएगा जीने का मजा,
डर पिछे छुट गया है,

जाकों राखें सांईयां,मार सके ना कोई,
अब दुश्मन पीछे छूट गया है ,

नहीं पसंद आने वाले दिनों को भुल जाओ,
वो समय तो बित गया है,

लबालब भर लो खुशियां झोली में,
गम हमसे कोसों दूर भाग गया है,

नये सूरज को बुझाने कि कवायद ना किया करो,
जीवन के अंधियारों को तो ज्ञान का दीपक मीटा गया ,

तो फिर वो कौन था जो हमें रुला कर चला गया,

हमारे मासुम से दिल को जला गया,

जिंदगी भर याद रहेगा वो बिता समय हमें,

हमारे मन को बेवफा
समय के हाथों छला गया।।

अशोक कुमार सुमन भवानी मंडी (राज.)

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