
ऐ जो सपने जो कभी लगते हैं अपने
मुझे लगता है भ्रम होते है
जो सुप्तावस्था में देखे जाते है
वह सदैव उलट होते है
जागते सपनों का भी अधिक
कोई अधिक औचित्य नहीं
यह उम्र के साथ बदलते है
नए नए रूप नित धरते हैं
कुछेक लोग ऐसे है दुनियाँ मे
जो कर्मठ हो कर सपने पूरे करते है
किसी परिस्थिति में नहीं डरते है
अपने कर्तव्यपथ पर चलकर
प्रभु को नित ध्यान रखकर
दुर्गम को सुगम बनाते हैं
वही लोग तो दुनियाँ में
अपना अलग मकाम बनाते हैं
जन श्रेष्ठ बन अलग से पहचाने जाते है
अपने सपनों को उड़ान देने के लिए
दृढ़ संकल्प जरूरी है
कर्म – और प्रभु का साथ भी बहुत जरूरी है ।
शीलू जौहरी भरूच











