Uncategorized
Trending

लल्ला तुम्हें बुलाऊँ

उत्साहित मन सोच रहा ,
कृष्ण कैसे मिलने आऊ
कैसे पहनूं,पायल मैं
कैसे तुम्हे रिझाऊं।।

कैसे कह दूं ,बात हृदय की
कैसे तुम्हें ,व्यथा बताऊँ
न मै मीरा, न मैं राधा
बस तेरी जोगन होना चाहूँ ।।

प्रीत का धागा बांध कर ,
तुम्हें देखूं और रिझाऊं
कभी यशोदा लाल कह दूं
कभी लल्ला तुम्हे बुलाऊँ।।

मोर मुकुट वाले को ,
कही नज़र न मेरी लग जाए
श्रृंगार करूँ ,पीताम्बर पहनकर
मोती माला संग ,कला टीका लगाऊँ

गोपियों संग मेरा खेले कन्हैया
आ तोहे झूला ,मै तनिक झुलाऊं
मक्खन चोर ,नन्द के लाल
आजाओ तुम्हें मोहन भोग लगाऊँ।।

आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश, ग्वालियर
भारत

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *