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World of Chemistry Group प्रस्तुत करता है – HomeLab Eco-Friendly Bio-Plastic project

सुशी सक्सेना

World of Chemistry group द्वारा एक होमलैब एक्सपेरिमेंट प्रोजेक्ट पर प्रयोग किया गया । World of Chemistry Group के सभी सदस्यों के अनुसार बायो-प्लास्टिक मेकिंग होम लैब पर्यावरण के लिए एक बहुत ही शानदार और प्रेरणादायक प्रोजेक्ट है! इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है। जिसे सुशी सक्सेना, सुनीता और रोहित ने घर पर ही बना कर दिखाया।

इसके लिए आवश्यक सामग्री आपको अपनी रसोई या पास की दुकान पर आसानी से मिल जाएंगी।

  1. कॉर्न स्टार्च / मक्के का आटा
  2. पानी
  3. सिरका – यह स्टार्च के मॉलिक्यूल्स को तोड़ने में मदद करता है।
  4. ग्लिसरीन – यह प्लास्टिक को लचीला/फ्लेक्सिबल बनाता है
  5. फूड कलर – 1-2 बूंदें (वैकल्पिक – अगर आप रंगीन प्लास्टिक बनाना चाहते हैं)

इसके लिए आवश्यक उपकरण भी आपको अपनी रसोई में ही आसानी से मिल जाएंगी।

  • एक छोटा पैन या बर्तन (सॉसपैन)
  • चमचा (हिलाने के लिए)
  • गैस स्टोव या इंडक्शन
  • एल्युमिनियम फॉयल या बटर पेपर (प्लास्टिक को सुखाने के लिए)।

इसे बनाने के लिए सबसे पहले पैन में बिना गैस जलाए कॉर्न स्टार्च या मक्के का आटा, पानी, सिरका और ग्लिसरीन को एक साथ डाल लें। अगर रंग चाहिए, तो फूड कलर भी डाल दें। चम्मच से तब तक हिलाएं जब तक कि सारा स्टार्च पानी में अच्छे से घुल न जाए और कोई गांठ न रहे। अब पैन को धीमी आंच पर गैस पर रखें। इसे लगातार चम्मच से हिलाते रहें ताकि यह बर्तन के नीचे न चिपके। लगभग 2-3 मिनट में ही यह मिश्रण पारदर्शी और बहुत गाढ़ा (जैसे जेली या गोंद) होने लगेगा। जब यह पूरी तरह से चमकदार जेली जैसा दिखने लगे और उबलने जैसा हो जाए, तो गैस बंद कर दें। अब इस गर्म जेली को तुरंत एल्युमिनियम फॉयल या बटर पेपर पर पलट दें। इसे चम्मच या रोलर की मदद से जितना हो सके उतना पतला और एक समान फैला लें। (आप चाहें तो इसे किसी कटर की मदद से कॉइन या स्टार का शेप भी दे सकते हैं)। इसे किसी सुरक्षित और सूखी जगह पर 24 से 48 घंटे के लिए सूखने छोड़ दें। जैसे-जैसे पानी सूखेगा, यह पूरी तरह से कड़ा और प्लास्टिक की शीट जैसा बन जाएगा। इस प्रयोग से सिर्फ प्लास्टिक बनाना ही नहीं, आप इस पर रिसर्च भी कर सकते हैं।

  1. प्रयोग 1 (लचीलापन टेस्ट): एक बैच में ग्लिसरीन ज्यादा डालें और दूसरे में कम। आप देखेंगे कि ज्यादा ग्लिसरीन वाला प्लास्टिक रबर जैसा लचीला बनता है और कम ग्लिसरीन वाला कांच जैसा कड़ा और भंगुर।

2 प्रयोग 2 (बायो-डीग्रेडेशन टेस्ट): इस प्लास्टिक के टुकड़े को गमले की मिट्टी में दबा दें और रोज पानी दें। आप ट्रैक कर सकते हैं कि यह कितने दिनों में पूरी तरह गलकर मिट्टी में मिल जाता है।

बायो-प्लास्टिक का फॉर्मूला जानने के बाद, अब आप अपने होमलैब में इससे 3 बेहतरीन और उपयोगी चीजें बना सकते हैं।

  1. इको-फ्रेंडली बायो-प्लास्टिक शीट्स – जिसका उपयोग आप पैकेजिंग़ रैपर या फाइल्स के कवर की तरह कर सकते हैं।
  2. सांचे की मदद से चम्मच या कटोरी बना कर
    आप डिस्पोजेबल बर्तनों का एक बेहतरीन और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प तैयार कर सकते हैं।
  3. जैविक पौधे के गमले: छोटे पौधों को उगाने के लिए छोटे कप या गमले बनाए जा सकते हैं, जिन्हें सीधे मिट्टी में प्लांट किया जा सके।

World of Chemistry Group प्रस्तुत करता है – HomeLab Eco-Friendly Bio-Plastic project

सुशी सक्सेना

World of Chemistry group द्वारा एक होमलैब एक्सपेरिमेंट प्रोजेक्ट पर प्रयोग किया गया । World of Chemistry Group के सभी सदस्यों के अनुसार बायो-प्लास्टिक मेकिंग होम लैब पर्यावरण के लिए एक बहुत ही शानदार और प्रेरणादायक प्रोजेक्ट है! इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है। जिसे सुशी सक्सेना, सुनीता और रोहित ने घर पर ही बना कर दिखाया।

इसके लिए आवश्यक सामग्री आपको अपनी रसोई या पास की दुकान पर आसानी से मिल जाएंगी।

  1. कॉर्न स्टार्च / मक्के का आटा
  2. पानी
  3. सिरका – यह स्टार्च के मॉलिक्यूल्स को तोड़ने में मदद करता है।
  4. ग्लिसरीन – यह प्लास्टिक को लचीला/फ्लेक्सिबल बनाता है
  5. फूड कलर – 1-2 बूंदें (वैकल्पिक – अगर आप रंगीन प्लास्टिक बनाना चाहते हैं)

इसके लिए आवश्यक उपकरण भी आपको अपनी रसोई में ही आसानी से मिल जाएंगी।

  • एक छोटा पैन या बर्तन (सॉसपैन)
  • चमचा (हिलाने के लिए)
  • गैस स्टोव या इंडक्शन
  • एल्युमिनियम फॉयल या बटर पेपर (प्लास्टिक को सुखाने के लिए)।

इसे बनाने के लिए सबसे पहले पैन में बिना गैस जलाए कॉर्न स्टार्च या मक्के का आटा, पानी, सिरका और ग्लिसरीन को एक साथ डाल लें। अगर रंग चाहिए, तो फूड कलर भी डाल दें। चम्मच से तब तक हिलाएं जब तक कि सारा स्टार्च पानी में अच्छे से घुल न जाए और कोई गांठ न रहे। अब पैन को धीमी आंच पर गैस पर रखें। इसे लगातार चम्मच से हिलाते रहें ताकि यह बर्तन के नीचे न चिपके। लगभग 2-3 मिनट में ही यह मिश्रण पारदर्शी और बहुत गाढ़ा (जैसे जेली या गोंद) होने लगेगा। जब यह पूरी तरह से चमकदार जेली जैसा दिखने लगे और उबलने जैसा हो जाए, तो गैस बंद कर दें। अब इस गर्म जेली को तुरंत एल्युमिनियम फॉयल या बटर पेपर पर पलट दें। इसे चम्मच या रोलर की मदद से जितना हो सके उतना पतला और एक समान फैला लें। (आप चाहें तो इसे किसी कटर की मदद से कॉइन या स्टार का शेप भी दे सकते हैं)। इसे किसी सुरक्षित और सूखी जगह पर 24 से 48 घंटे के लिए सूखने छोड़ दें। जैसे-जैसे पानी सूखेगा, यह पूरी तरह से कड़ा और प्लास्टिक की शीट जैसा बन जाएगा। इस प्रयोग से सिर्फ प्लास्टिक बनाना ही नहीं, आप इस पर रिसर्च भी कर सकते हैं।

  1. प्रयोग 1 (लचीलापन टेस्ट): एक बैच में ग्लिसरीन ज्यादा डालें और दूसरे में कम। आप देखेंगे कि ज्यादा ग्लिसरीन वाला प्लास्टिक रबर जैसा लचीला बनता है और कम ग्लिसरीन वाला कांच जैसा कड़ा और भंगुर।

2 प्रयोग 2 (बायो-डीग्रेडेशन टेस्ट): इस प्लास्टिक के टुकड़े को गमले की मिट्टी में दबा दें और रोज पानी दें। आप ट्रैक कर सकते हैं कि यह कितने दिनों में पूरी तरह गलकर मिट्टी में मिल जाता है।

बायो-प्लास्टिक का फॉर्मूला जानने के बाद, अब आप अपने होमलैब में इससे 3 बेहतरीन और उपयोगी चीजें बना सकते हैं।

जैविक पौधे के गमले: छोटे पौधों को उगाने के लिए छोटे कप या गमले बनाए जा सकते हैं, जिन्हें सीधे मिट्टी में प्लांट किया जा सके।

इको-फ्रेंडली बायो-प्लास्टिक शीट्स – जिसका उपयोग आप पैकेजिंग़ रैपर या फाइल्स के कवर की तरह कर सकते हैं।

सांचे की मदद से चम्मच या कटोरी बना कर
आप डिस्पोजेबल बर्तनों का एक बेहतरीन और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प तैयार कर सकते हैं।

सुशी सक्सेना

World of Chemistry group द्वारा एक होमलैब एक्सपेरिमेंट प्रोजेक्ट पर प्रयोग किया गया । World of Chemistry Group के सभी सदस्यों के अनुसार बायो-प्लास्टिक मेकिंग होम लैब पर्यावरण के लिए एक बहुत ही शानदार और प्रेरणादायक प्रोजेक्ट है! इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है। जिसे सुशी सक्सेना, सुनीता और रोहित ने घर पर ही बना कर दिखाया।

इसके लिए आवश्यक सामग्री आपको अपनी रसोई या पास की दुकान पर आसानी से मिल जाएंगी।

  1. कॉर्न स्टार्च / मक्के का आटा
  2. पानी
  3. सिरका – यह स्टार्च के मॉलिक्यूल्स को तोड़ने में मदद करता है।
  4. ग्लिसरीन – यह प्लास्टिक को लचीला/फ्लेक्सिबल बनाता है
  5. फूड कलर – 1-2 बूंदें (वैकल्पिक – अगर आप रंगीन प्लास्टिक बनाना चाहते हैं)

इसके लिए आवश्यक उपकरण भी आपको अपनी रसोई में ही आसानी से मिल जाएंगी।

  • एक छोटा पैन या बर्तन (सॉसपैन)
  • चमचा (हिलाने के लिए)
  • गैस स्टोव या इंडक्शन
  • एल्युमिनियम फॉयल या बटर पेपर (प्लास्टिक को सुखाने के लिए)।

इसे बनाने के लिए सबसे पहले पैन में बिना गैस जलाए कॉर्न स्टार्च या मक्के का आटा, पानी, सिरका और ग्लिसरीन को एक साथ डाल लें। अगर रंग चाहिए, तो फूड कलर भी डाल दें। चम्मच से तब तक हिलाएं जब तक कि सारा स्टार्च पानी में अच्छे से घुल न जाए और कोई गांठ न रहे। अब पैन को धीमी आंच पर गैस पर रखें। इसे लगातार चम्मच से हिलाते रहें ताकि यह बर्तन के नीचे न चिपके। लगभग 2-3 मिनट में ही यह मिश्रण पारदर्शी और बहुत गाढ़ा (जैसे जेली या गोंद) होने लगेगा। जब यह पूरी तरह से चमकदार जेली जैसा दिखने लगे और उबलने जैसा हो जाए, तो गैस बंद कर दें। अब इस गर्म जेली को तुरंत एल्युमिनियम फॉयल या बटर पेपर पर पलट दें। इसे चम्मच या रोलर की मदद से जितना हो सके उतना पतला और एक समान फैला लें। (आप चाहें तो इसे किसी कटर की मदद से कॉइन या स्टार का शेप भी दे सकते हैं)। इसे किसी सुरक्षित और सूखी जगह पर 24 से 48 घंटे के लिए सूखने छोड़ दें। जैसे-जैसे पानी सूखेगा, यह पूरी तरह से कड़ा और प्लास्टिक की शीट जैसा बन जाएगा। इस प्रयोग से सिर्फ प्लास्टिक बनाना ही नहीं, आप इस पर रिसर्च भी कर सकते हैं।

  1. प्रयोग 1 (लचीलापन टेस्ट): एक बैच में ग्लिसरीन ज्यादा डालें और दूसरे में कम। आप देखेंगे कि ज्यादा ग्लिसरीन वाला प्लास्टिक रबर जैसा लचीला बनता है और कम ग्लिसरीन वाला कांच जैसा कड़ा और भंगुर।

2 प्रयोग 2 (बायो-डीग्रेडेशन टेस्ट): इस प्लास्टिक के टुकड़े को गमले की मिट्टी में दबा दें और रोज पानी दें। आप ट्रैक कर सकते हैं कि यह कितने दिनों में पूरी तरह गलकर मिट्टी में मिल जाता है।

बायो-प्लास्टिक का फॉर्मूला जानने के बाद, अब आप अपने होमलैब में इससे 3 बेहतरीन और उपयोगी चीजें बना सकते हैं।

  1. इको-फ्रेंडली बायो-प्लास्टिक शीट्स – जिसका उपयोग आप पैकेजिंग़ रैपर या फाइल्स के कवर की तरह कर सकते हैं।
  2. सांचे की मदद से चम्मच या कटोरी बना कर
    आप डिस्पोजेबल बर्तनों का एक बेहतरीन और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प तैयार कर सकते हैं।
  3. जैविक पौधे के गमले: छोटे पौधों को उगाने के लिए छोटे कप या गमले बनाए जा सकते हैं, जिन्हें सीधे मिट्टी में प्लांट किया जा सके।

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