
नन्हे पाँवों की धमक, गूँजे गलियारों में,
हँसी-खुशी का आलम, सपनों के संसारों में।
कक्षा ऐसी सजीव, जहाँ किताबें गाएँ,
हर बच्चे का सपना, रंग बिरंगे सजाएँ।
शिक्षक न हों बस गुरु, प्रेम से ज्ञान बाँटें,
हर सवाल का जवाब, मन के द्वार खोलें।
खेल का मैदान विशाल, जहाँ उड़ानें हों नई,
नन्हे मन की उमंग, पंख लगाकर जयी।
न कोई डर, न दबाव, बस आजादी की सैर,
हर बच्चा खिले यहाँ, जैसे फूलों की खैर।
विज्ञान की प्रयोगशाला, कला का रंगमंच,
सपनों का स्कूल मेरा, हर बच्चे का संच।
यहाँ सीखें सब प्यार, एकता और विश्वास,
मेरे सपनों का स्कूल, बनाए सुनहरा विश्वास।
बालकवि कार्तिक तिवारी “पहाड़ी”
ग्राम गोपेश्वर
जिला चमोली उत्तराखंड











