
पता नहीं कब क्या हो जाए,
पता नहीं, किसी राह में कब कौन मिल जाए,
पता नहीं किस को किस बात पर मजा आ जाए,
पता नहीं किस को किस बात पर गुस्सा आ जाए,
पता नहीं किसी को किस गीत में बीती यादें मिल जाए,
पता नहीं किसी को , किसी गीत से आंखें नम हो जाए,
पता नहीं किसी को अपनों के साथ गुजारे लम्हों कि आह निकल आए ,
पता नहीं किसी को अपने सनम की अपने मेहबूब की याद सता जाए,
पता नहीं किसी को किसी बात में हंसी मिल जाए,
पता नहीं किसी को उसी बात से दिल दुःख जाए
तो कभी ऐसा भी किया करो दोस्तो ,
इन लम्हों को यादगार बनाते जाएं,
मिल बैठ कर प्यार लुटाते जाएं ,
मिल बैठ कर कोई गीत गाते जाएं झुमके नाचते जाएं,
रुठे हुए को चलों मनातें जाएं,हंसाते जाएं,
पता नहीं ना जाने कौन बिछड़ जाए कब जिंदगी सांझ हो जाए ,
पता नहीं ना जाने कब दिन ढल जाए,
पता नहीं ना जाने कब रात हो जाए,
पता नहीं ना जाने कब किसी से मुलाकात हो जाए,
पता नहीं ना जाने किस से किस को प्यार हो जाए।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज .)











