
कल हुई जो मस्त बारिश, वो एक सुहानी रात थी,
दिखने में मैं एक ही थी, पर कल्पना में किसी के साथ थी।।
मेरे मन के भावों में, था वह मुरली वाला।
पीत वस्त्र, अरु मोर मुकुट, आँखों में काजल डाला।।
❤️उजयारी रात, चहुँ ओर घटा, ठंडी हवाएँ चलती थी।
बंसी की धुन, मेघ की वर्षा, जनु स,, र,, ग,, म, सुनने को मिलती थी।।
बरसात रुकी प्रकृति शांत भई, तब दिखने लगे चाँद सितारे।
दुधिया प्रकृति, ठंडा अनिल, जुगनू जनु दिप कतारे।।
साथ था मेरे प्रभु का, उनसे मिलकर मैं पूर्ण हुई।
थी मैं प्यासी नदियाँ सी, जनु सिंधु में जा अनुलिप्त भई।।
ऋचा चंद्राकर 'तत्वाकांक्षी'











