
एक बांसुरी तान सुनाकर,
सबका मन जिसने जीता,
उसी यशौदा के नंदन संग,
ग्वालों का बचपन बीता,
यमुना के तट पर कान्हां ने,
रास रचाई गोपी संग,
ग्वालों के संग कंदुक खेली,
हुआ कालिया का मर्दन,
इन्द्र देव का दंभ मिटाया,
गोवर्धन को उठा लिया,
जन जीवन की लाज बचाई,
महा प्रलय से बचा लिया,
चोरी कर माखन की ब्रज में,
ग्वाल बाल संग खेल किया,
मटकी तोड़ी घर-घर जाकर,
सभी जनों संग मेल किया,
ऐसे कान्हां का जन्मोत्सव,
मिलकर हम सब मना रहे,
जन्म अष्टमी कान्हा जी की,
उत्सव जैसा बना रहे,
झांकी कोई सजाए घर पर,
कोई मंदिर में जाए,
राधे मोहन का जप गाए,
हरि प्रसाद कोई पाए,
जन्म दिवस कान्हां का आया,
घर-घर उत्सव मना रहे,
छप्पन भोग बनाकर अपने,
मुरलीधर को खिला रहे,
के वी











