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साक्षरता

विधा : पद्य
राष्ट्र की साक्षरता योजना ,
सफलीभूत हम बनाऍंगे ।
ना से तो यह है हाॅं भला ,
साक्षर तो हम कहलाऍंगे ।।
न काला वर्ण भैंस बराबर ,
न ही अनपढ़ रह पाऍंगे ।
नहीं तो सुशिक्षित सुयोग्य ,
कुछ लिख पढ़ तो पाऍंगे ।।
हम बदलेंगे पीढी बदलेंगी ,
साक्षर से सुशिक्षित होंगे ।
निरक्षरता के शाप से हम ,
नहीं कभी उपेक्षित होंगे ।।
राष्ट्र यह न उपेक्षित होगा ,
राष्ट्र से यह अपेक्षित होगा ।
राष्ट्र नहीं किसी पर निर्भर ,
राष्ट्र सदा निरपेक्षित होगा ।।


अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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