
कविता
मन के मंदिर में जब प्रेम का दीप जले,
दीप जले तो हर दिशा में राम मिले।
राम मिले तो जीवन में विश्वास खिले,
विश्वास खिले तो दुख के बादल दूर चले।
दूर चले अहंकार, हृदय में विनय खिले,
विनय खिले तो सेवा के सुंदर भाव मिले।
भाव मिले तो हर प्राणी में प्रभु दिखें,
प्रभु दिखें तो मन में सच्चे संस्कार मिले।
संस्कार मिले तो सत्य की राह मिले,
राह मिले तो जीवन को नई चाह मिले।
चाह मिले तो कर्मों में उजियारा हो,
उजियारा हो तो हर मन में सहारा हो।
सहारा हो तो निर्बल को भी बल मिले,
बल मिले तो प्रेम से सबको संबल मिले।
संबल मिले तो कटुता मन से दूर हो,
दूर हो तो रिश्तों में मधुरता भरपूर हो।
भरपूर हो करुणा, दया और सद्भाव,
सद्भाव में ही मिलता राम का भाव।
भाव सच्चा हो तो हर पल राम मिले,
राम मिले तो जीवन को परम धाम मिले।
रचनाकार — कौशल
मुड़पार चु , पोस्ट रसौटा,तहसील पामगढ़,जिला जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़











