वृक्ष एक मूक मित्र
विधा – काव्य
वृक्ष मनुष्य के मूक मित्र है
जीवन चक्रधारा के चलचित्र है
शान्तचित्त रहते सदा धरा के वाहक है
शीतलता के बयार है
शान्तचित्त विशालता के अंगीकार है
वृक्ष मनुष्य के मूक मित्र है
प्रकृति के ध्वजवाहक है
ईश्वर तुल्य शहनशीलता के परिचायक है
हरीमा की चादर ओढ़े धरती माँ के कंठहार है
मनुष्य के सांसों का आधार है
वृक्ष जीवन के पालनहार है स्वसमाहित संसार के वृक्ष मूक मित्र है
जीवन चक्रधारा के सजीव चलचित्र है
आज क्रान्कीट जंगल का चहूं ओर विकास है
वृक्षों का हर तरफ विनाश है
छदम भौतिकतावादी सुविधाओं मे वृक्षों का ह्वास है
मत मिटा अपने हाथों से अपने अस्तित्व को है मनु
जीवनदायक आरोग्य दायक वृक्षों को सहेजना है
इन्ही से धरा का जीवन है और धरा है तो महकता सुरम्य प्रकृति का आंगन है
शुद्ध पवन के झोंकों मे वृक्ष हमारे मूक मित्र है
निर्मल हृदय के धारक वृक्ष से ही जीवन का उज्जवल चरित्र है
वृक्ष हमारे मूक मित्र है
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र











