
हिंदू लड़े ,,,,,हिंदू से
आंतरिक युद्ध लड़ रहे
रक्त रंजित तलवारे ये खींचेंगे
नहीं स्वतंत्र होना किसी से
बस अभिमान की रेखा खींचेंगे।।
मर कट मचाने को तैयार ,
हर हिन्दू ,हर त्यौहार
तू ऊँचा में नीचा कैसे
तू पंडित मै बनिया कैसे
तू अहीर ,मै कुम्हार कैसे
भेद भाव का मचा बवंडर
लगता है जल्दी सब डूबेंगे ।।
बची रहेंगी तब सिसकियां
या उजड़ी हुई कलाईयां और माँग
अनाथों की किलकारियां होंगी
जात पात नहीं न वंश होंगे
सब मजबूरी का आटा पीसेंगे ।।
सम्भल जाओ ,,,,,
मानवता को मनाओ ,,,,,,
जात पात की वेदी पर
हवन हुआ आज हिंदुत्व का
रक्त रंजित आहुति से
न इसे अब और भड़काओ ।।
©आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश, ग्वालियर
भारत











