विषय – गजानन बब्बा
विधा – स्तुति काव्य
जय बोलो ओम गणपति देव
रिद्धी सिद्धी के दाता जगत के प्रथम देव
करते मूसक की सवारी
नाम तुम्हारा ही सर्वत्र मंगलकारी
लडवन का भोग तुम्हारा आहार
दुष्टों के काल जगत के पालनहार
सुखान्तकारी युगान्तकारी दिगान्तकरी
देवों के देव नाम ही तुम्हारा कल्याणकारी
त्रिभुवन के जन रिपुदमन
है प्रथम नमन आपको है गजानन
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र











