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अलंकृत हिंदी


रस लय छंद अलंकृत हिंदी,
भाषाओं की प्राण है हिंदी!
संस्कृत की तत्सम अभिलाषा,
विश्व पटल की शान है हिंदी!!

सुंदर सरस सलोनी हिंदी,
अद्भुत सोहे भाल पर बिंदी!
सहज सुबोध सुसंस्कृत भाषा,
हिय सबका हर्षाती हिंदी!!

संस्कृत के अंतस से निकसी
अनुपम रत्न अनोखी हिंदी!
सुर लय ताल श्लोक छंद बद्ध,
सबके मनको भाती हिंदी!!

मैकाले का छोड़ धरोहर,
हिंदी अपनाएं हम घर घर!
लें संकल्प सभी ‘जिज्ञासु’ जन ,
मान बढ़ाएं विश्व पटल पर!!

कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’

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