
कविता
हिन्दी की महिमा
हिन्दी की महिमा लिखी किस- किसने श्रीमान।
गौरव गाथा से भरा ,हिन्दी का स्थान।।
सूरदास के पद हो चाहे , तुलसी की चौपाई।
जन जन ने हर कालखंड में हिन्दी महिमा गाई।।
जायसी की पद्मावत हो या बिहारी की सतसई।
चिंतामणि के काव्य विवेक ने हिन्दी में की बढ़ाई।।
भूषण का छत्रसाल दशक और केशव की कविप्रिया।
घनानंद की प्रेम पत्रिका पढ़कर लागे जिया।।
प्रसाद की कामायनी हो या पंत का हो गुंजन।
दिनकर का कुरुक्षेत्र भी हिन्दी मे करता वन्दन ।।
सोहनलाल की हो पूजा के स्वर ।
अज्ञेय की हरी घास पर क्षण भर।।
बच्चन की मधुशाला हो, रामकुमार की आकाश गंगा।
हिन्दी की महिमा से भरी ये पावन काव्य गंगा।।
प्रेमचंद ने किसानों व गांवों की बात बताई।
लिखी हिन्दी में कथाएं खूब प्रसिद्धि पाई।।
अमर हो गए कालजयी कृतियों से कितने ही भाई।
हिन्दी है भारत के भाल की बिंदी, मिलकर कहो भाई।।
हिन्दी बोलो,हिन्दी लिखो, हिन्दी का गुणगान करो।
ओ हिन्दी सेवी हस्ताक्षर केवल हिन्दी मे करो।।
अहिन्दी प्रान्तों में जाकर हमें हिन्दी सीखाना है।
अंग्रेजी का मोह छोड़ने के कारण भी बताना है।।
शब्द स्वर व्यंजन से सशक्त है जिसकी व्याकरण।
भारत की भाषा के अंगीकार से सुधर जाते आचरण।।
अमर शहीदों की भाषा हिन्दी यह हम सबकी अभिलाषा है।
दीन दुखी दरिद्र की आशा ये, यह जीवन की परिभाषा है।।
माँ शारदे की हो कृपा तब हिन्दी शब्द उतरते हैं।
कवियों के समझो तभी अच्छे दिन संवरते हैं।।
इसमे पंजाबी की धमाल गुजराती की मधुर वाणी है।
राजस्थानी की मिठास और रसमय देववाणी है।।
ऋषि मुनियों की भाषा हिन्दी आओ गौरव गान करें।
अपनी सभ्यता ,संस्कृति और भाषा का ध्यान धरें।।
डॉ. राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
कवि, साहित्यकार
भवानीमंडी जिला झालावाड़ राजस्थान











