
हिंदी विश्व की भाषा है
विश्व इसमें समाता है
मैं हिंद का रहने वाला हूं
हिंदी की गाथा गाता हूं
हिंदी में बोली भाषा का भेद नहीं
दिल का दिल से नाता है
उत्तर हो या दक्षिण
हर भाषा का भाषा से नाता है
तमिल तेलुगू
मलयाली कुसमित होती बंगाली
हो पहाड़ी या पंजाबी
या की हो गुजराती
हिंदी सबका मेल कराती
दिलों से मेल मिटाती
सुंदर सुवाच्य सुख दात्री
है यह जन-जन की थाती
यह वेदों की भाषा है जो संस्कृत भाषा कहलाती है
वेदों में वर्णन है जिसका
अब देव नागरी कहलाती है
है भारत माता की बिंदी
दुनिया में बोली जाती है
सूर कबीर मीरा तुलसी सबके मन को हर्षाती है
इतनी ममता भाषाओं की नहीं देखने में आती है
ये सब भाषाएं रिश्ते में
बहनें बहनें कहलाती है
आदर होता सब बहनों
सब विश्व में यश पाती है
जय हिंद हमारी जन भाषा है जो जन-जन से आती है
तक्षशिला नालंदा ने भी हिंदी की गौरव गाथा गाई है
कहत ‘राम इंदौरी’
हिंदी जन जन में छाई है
राम वल्लभ गुप्त ‘इंदौरी’












