
अंधियारे जीवन-पथ पर
जब कोई दीप जलाता है,
अपने हिस्से का उजियारा
दूजों में बाँट जाता है।
नहीं चाहता नाम किसी का,
नहीं चाहता यश-गान,
बस पीड़ा में मुस्कान बाँटे,
यही है उसका सच्चा मान।
किसी भूखे को रोटी देना,
किसी प्यासे को जल देना,
गिरते को फिर हाथ पकड़कर
जीवन जीने का बल देना।
किसी अकेली आँख के आँसू
चुपके से जो पोंछ गया,
वही तो सच्चा मानव है,
जो मानवता में रोप गया।
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र












