
रतिरूप छंद
मात्रा- 25
मापनी-2212-2212-2212-22
सृजन शब्द- संसार में प्रभु आप ही
सब के सहारे हो।
संसार में प्रभु आप ही सब के सहारे हो।
नैया हमारी बीच फँसती तुम किनारे हो।।
साहस भरो मन में सदा जीवन लगे हारा।
आलस हटे मन से करूँगा काम मैं सारा।।
दुनिया लुभाती आज भी प्यारी लगे माया।
व्याकुल हुआ मन आज है सहती रहे काया।।
रक्षक बने प्रभु आप ही जग में पधारे हो।
संसार में प्रभु ही सब के सहारे हो।।
नाकाम सी ये जिंदगी धीरज तुम्हीं देते।
उपहार में प्रभु आपतो कुछ भी नहीं लेते।।
मझधार में अटकी रही जीवन सदा प्यारे।
बिन आपके है कौन जो मुझको अभी तारे।।
बनते सदा साथी तुम्हीं मोहन हमारे हो।
संसार में प्रभु आप ही सब के सहारे हो।।
कश्ती सदा संसार की तुम ही चलाते हो।
बंशी बजा तुम आज भी सबको बुलाते हो।।
यमुना किनारे आज भी लहरे लुभाती हैं।
मुरली सुनाती तान जो सबको सुहाती है।।
माता यशोदा के बने तुम आज प्यारे हो।
संसार में प्रभु आप ही सब के सहारे हो।।
अंजलि किशोर “कृति “











