विधा – स्तुति काव्य
प्रभु श्री राम आये मेरे प्राण श्री राम आये
देख छवि आपकी प्रभु हम दो जख हो आये
मेरे राम आये मेरे राम आये
बड़ी देर लगी आपको आने मे प्रभु
धैर्य की अग्नि परीक्षा खूब ली आपने प्रभु
जब आये तो खूब आये प्रभु
सारा संसार ही भाव विव्हल हो गया
आपकी छवि से हम निहाल हो गये
चरणो मे आपके जीवन चला जाये
खूब आये प्रभु मेरे राम आये
तीनो लोक के लोकाधीश भारत को आपने अपना कर्म बनाया
दुनिया को धर्य मर्यादा अनुशासन वचन निभाने का पाठ पढाया
प्रेम का एक नया सौपान दिखाया
ऊंच नीच से परे मनुष्यत्व का महत्व बताया
अपनत्व का एक नया रूप दिखाया
संपूर्णता मे ही सम्पूर्ण होने का अहसास कराया
लेकर अपना विराट दैवत्व रूप प्रभु आये
बस मेरे राम आये मेरे ही राम आये
भावविभोर हो गया प्रभु आप आये
मेरे राम मेरे राम आये
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र











