
इंसान हो इंसान की कद्र कर लो,
मनुष्यत्व को अपनाकर दामन में खुशियाँ भर लो।
ईर्ष्या -द्वेष से न कुछ मिल पाएगा,
प्रेम सुधा पीकर ही हर एक का जीवन खिल पाएगा।
मानव जीवन पाने का क्या फायदा?
गर इंसानियत का न सीख पाए कोई कायदा।
किसी दुखी आत्मा के जीवन का दर्द हर लो,
इंसान हो इंसान की कद्र कर लो।
ब्रह्माण्ड में जब अलग पहचान है हमारी,
तो फिर क्यों न करें धर्म-युग के निर्माण की तैयारी।
परमार्थ हेतु अपना-अपना कर्तव्य कर लो,
इंसान हो इंसान की कद्र कर लो।
मिथ्या ग़ुरूर के हावी होते ही सब हो जाता चकनाचूर,
वर्चस्व की होड़ में मानव खुद ही हो जाता सबसे दूर।
धर्मरक्षक व्रतधारी बन आज ही व्रत धर लो,
इंसान हो इंसान की कद्र कर लो।
हे भारत के लाल! तुम विश्वबन्धुत्व के रक्षक हो।
विश्वविजयी मानवता के प्रेमी हो।
हे मेरे प्रियों प्रेम सुधा अमृत बरसा सबके दुःख हर लो।
इंसान हो तो इंसान की कद्र कर लो।
प्रबल इच्छा से तुमने पाताल में भी उन्नति के द्वार खोले,
विपदा में मानव रक्षा हेतु बन शेषनाग के फन से डोले।
बन हनुमान सबको अपने अंग में भर लो,
हो अगर इंसान तो इंसान की कद्र कर लो।
आशीष कुमार
हमीरपुर
(उत्तर प्रदेश)











