
विधा : पद्य
संस्कृत राष्ट्र के बाटे लिट्टी ,
हिंदी बाटे लिट्टी पे चोखा ।
भोजपुरी बा ओह पे दही ,
संस्कृति भाव अनोखा ।।
जईसन सादा बा जीवन ,
वोईसने सादा ह भोजन ।
ना एहमें चिकन चुलबुल ,
सादगी एकर बाटे रुचन ।।
ना जीवन में शिकार बाटे ,
जीवन स्वयं सितार बाटे ।
अंतर्मन के ई मधुर ध्वनि ,
जहाॅं ढेर भरल प्यार बाटे ।।
समृद्ध भारत समृद्ध भाषा ,
आदर सत्कार बसे श्वासा ।
तन मन ना एह से वंचित ,
निश्छल प्यार ह पिपासा ।।
ना एहमें बा वाद प्रतिवाद ,
ना एहमें कोई बा विवाद ।
सबके जोड़ परिवार बनावे ,
सबके जीवन करे आह्लाद ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।













