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स्कंद माता भवानी पंचम नवरता में

एक कविता

स्कंद माता भवानी पंचम नवरता में

नवरात्रि में पंचम नवरता में मां भवानी ममता मयी स्वरूप में माता,

स्कंद कहो या कहो कार्तिक एक बार ध्यान में रखते ही सकुशल मंगल कामना संपन्नता
करतीं हैं माता,

हर कोई देख मां की कमलासन की छबी न्यारी,

स्कंद गोद में आंखों में ममता और अधर पर मुस्कान प्यारी ,

बड़ी करुणा मयी है मेरी माता
अष्ट भुजा शुभ प्रदा सृष्टि को सहेज रही है सदा माता,
कमल हासन कमल हाथ वरदा वरदानी,एक हाथ स्कंद सोहे माता,

ब्रह्मा जी से वरदान लिया तारकासुर ने शिव पुत्र ही मार सके,

गौरी की तपस्या से शिव के विवाह से कार्तिकेय ने छ:दिन में ही देवता के सेनापति बन संग्राम में तारकासुर वध किया ,
नाम हुआ स्कंद माता।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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