
स्वर्णिम बुद्ध प्रतिमा खड़ी, देती शांति संदेश। करुणा, मैत्री, प्रेम से, सुंदर हो परिवेश॥
विशाल प्रतिमा देखिए, मन में जागे ज्ञान। अहिंसा के मार्ग पर, बढ़ता रहे इंसान॥
चेहरे पर गंभीरता, आँखों में विश्वास। त्याग, तपस्या, साधना, जग में भरती आस॥
ऊँचा आसन कह रहा, ऊँचे रखिए विचार। मन से मिट जाए सदा, घृणा, द्वेष, अंधकार॥
हरियाली की गोद में, स्वर्णिम छवि अनमोल। प्रकृति सुनाती प्रेम से, शांति-सुधा के बोल॥
मैं भी इस परिवेश में, पाता सुखद एहसास। बुद्ध-विचारों से सजे, जीवन का आकाश॥
मानवता का धर्म ही, सबसे बड़ा विधान। दया, प्रेम, सद्भाव से, ऊँचा बने इंसान॥
संदेश: बुद्ध का पावन ज्ञान अपनाएँ, प्रेम और सद्भाव से, सुंदर जग बनाएं॥
रचनाकार
कौशल
मुड़पार चु ,पोस्ट रसौटा,तहसील पामगढ़,जिला जांजगीर-चांपा,छत्तीसगढ़












