
इतराती हुई महकती चांदनी में
छिड़े हैं सुर झूम उठी रागिनी।
छत में आया चंदा बरसाने अमृत
लजा रही अब प्रिया अनुगामिनी।
प्रेम_ सुधा में रोम – रोम तृप्तित।
स्मित सी हंसी में गाती सुहासिनी।
सुरभित अधरों पर मंद मंद मुस्कान
झुकी झुकी सी पलकें
मुख से फूट पड़ी अन्नतिम सी रोशनी।
स्वप्न साकार,मिटा हृद- हाहाकार।
आगत है दिवा -निशा कितनी मनभावनी।
हर्ष व्याप्त ,जीवन डगर डगर
बिखेरते हैं सप्तम स्वर,कंगन संग संग पावन सी पैजनी।
प्रियतम का अमृत स्पर्श
व्यापक हुआ उत्कर्ष।
समय की बेला अब हो रही
सुख दायिनी।
झुकी झुकी सी पलकें
संकेतक मन की
साजन का पथ निहार
बैठी मृगनयनी।
जोहती है बाट भी ,चूमती है पाथ भी
पिया की अनछुई आएगी यामिनी।
पिया की अनछुई आएगी यामिनी।।
डॉ नवनीता दुबे नूपुर
मंडला,मप्र













