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तेरे बिना मैं कहाँ?

तुमसे मोहब्बत हुई
तो लगता है जैसे
खुद को ही खो दिया कहीं
रुत भी बदल गई,
चेहरे का रंग भी ढल गया,
और दिल…
दिल तो जैसे तुम्हारी राहों में
अपना घर बना बैठा है।

मैं तुमसे बहुत प्रेम करता हूँ,
इतना कि तुम्हारे बिना
जीना भी मुश्किल सा लगता है।
पर जीवन अनमोल है
इसे किसी डर, किसी दर्द के नाम
कैसे मिटा दूँ?
तुम्हारे प्यार को
कैसे खत्म कर दूँ,
जब वह मेरी साँसों में बसा है,
मेरे दिल की धड़कनों में भी?

तुम आई थीं
तो मौसम महक उठा था,
तुम गईं
तो मेरी रुप ने
अपना रंग ही छोड़ दिया।
अब मैं
खुद को ढूँढता फिरता हूँ
कहीं यादों के रास्तों में,
कहीं तुम्हारी मुस्कान के
धुँधले साए में।

तुम हो
तो दुनिया रोशन है,
तुम न हो
तो उजालों में भी
एक अजीब सा अँधेरा उतर आता है।
पर प्रेम…
प्रेम तो फिर भी चलता रहता है
चोट खाकर,
टूटकर,
और फिर भी
पूरी शिद्दत से धड़कते हुए।
आर एस लॉस्टम

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