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वियोगः जीवन का अनकहा सच।।

हम जुड़ना सबसे चाहते हैं,
सबसे मिलकर सदैव रहते हैं।
हम यूं सब पर प्यार लुटाते हैं,
भला कब वियोग को चाहते हैं।।

हमने समय बदलते देखा हैं,
अपनो से बिछुड़ते देखा है ।
अपनो का गम सहते हुए देखा है,
समय संग अपनो को बदलते देखा हैं।।

वो निरंतर हमारे अपने बनकर,
हमारे प्यार की परीक्षा लेते रहे।
हमसे मीठी मीठी बाते करते रहे,
हमारी पीठ में खंजर चलाते रहे।।

हम हर बार उनको मनाते रहे,
उनके वियोग में तड़पते रहे।
चांदी की खनक पर नाचने वाले,
वो भला कब किसकी सुनते रहे।।


मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।

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