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बसंत

आओ बसंत प्यारे बसंत
हम सबके मन के रस बसंत
हम तरस गए तुम मिलन को
प्यासी प्रकृति निहारती आलिंगन को
जित देखो उधर पिपासा है
बस एक मिलन की आशा है
तुम आओगे तो हरितिमा
आयेगी
वृक्षों में कलियां मुस्कायेंगी
पत्तों को मिलेगा नव जीवन
फूलों को मिलेगा नित यौवन
पर्यावरण भी स्वच्छ हो जाएगा
जब शुद्ध पवन के झोंको को गले लगाएगा
क्योंकि तुम प्रकृति का श्रृंगार हो
तुम सबके जीवन का आधार हो
मां सरस्वती के चरण चूम तुम आते हो
इसलिए तो नया सबेरा लाते हो
आओ नव प्रकृति का आह्वान करो
इस ब्रह्मांड का तुम मान करो
ओढ़ाओ जग को हरी चादर
तब तो हम करेंगे आपका आदर
सबके मन में गूंजे मधुर छंद
आओ बसंत प्यारे बसंत
हम सबके मन के रस बसंत

सीमा राजपूत
शिक्षिका
बालक माध्यमिक शाला
बिछिया
जिला मंडला

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