शीर्षक- देश प्रेम
मेरी आन है भारत ,
मेरी शान है भारत ।
मैं हिन्द देश का बेटा हूँ,
मेरी पहचान है भारत।।
जन्म लिया है हिन्द की जमी पे,
ये जमी नहीं, ये शान हैं हमारी।
मातृभूमि कहते हैं हम इसको,
ये भारत देश पहचान हैं हमारी।।
हमारे देश भारत की बात हैं, कुछ निराली,
यहाँ बहती माँ गंगा, यमुना, नर्मदा हमारी।
ये केवल नदी नहीं है, ये माँ हैं हमारी,
ये हमारी मातृभूमि को सिंचित कर, करती हैं हरियाली।।
भारत की मातृभूमि के रूप भी हैं ,अनेक,
कहीं काली, कहीं भूरी, तो कहीं रेतीली हैं मिट्टी।
इसे सींचा हैं जिन्होंने, वो बेटे इसके महान हैं,
हम सब बेटे हैं भारत माँ के, भारत माँ हमारी पालन हार हैं।।
रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्य. विद्यालय बकोडी ,ब्लॉक- कुरई, जिला सिवनी (म.प्र.)











