
विश्वास का दूसरा नाम प्रेम है,
यहाँ नहीं स्वार्थ,लोभ का काम।
हम नित सब कुछ उसको मानते,
हरपल उसका करते है गुणगान।।
प्यार त्याग, तप एवं समर्पण है,
स्वत्व का सब कुछ यूं अर्पण है।
निश्छलता का ही यह दर्पण हैं,
सारे ईर्ष्या एवं द्वेष का तर्पण है।।
यह हमारे सुख दुःख की साथी है,
नित भूले बिसरे को याद दिलाती।
हमारे कर्मो की यह रेखा बतलाती,
डायरी सतरंगी प्रेम की बात बतलाती।।
अपने खून से हमने वो खत लिखे,
अपने प्रियतम को जो खत लिखे।
उनकी याद में जब आंसू छलके,
आज यादे उनकी यह ताज़ा करती।।
घर से चुपके चुपके मिलने जाते,
उनके संग सावन में झुला झुलते।
भीगे तन मन से तरबतर हो जाते,
उन यादों संग हम फिर खो जाते।।
जब कोख में था बेटा हमारे,
हम उससे नित जो बातें करते।
उछल कूद करता वो निशदिन,
हम हरदिन उसको लोरी सुनाते।।
जब टहलते वो गिरता आंगन में,
अंगुली पकड़ हम चलना सिखाते।
पा पा कह उसे बोलना सिखलाते
वो सावन सी यादे फिर बलखाती।।
स्वरचित,मौलिक,अप्रकाशित है।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।











